मुख्य विचार
चुंबकीय क्षेत्र गतिमान आवेशों से बनते हैं और गतिमान आवेशों पर बल लगाते हैं। बल हमेशा क्षेत्र और वेग दोनों के लंबवत होता है, इसलिए वह गति की दिशा बदलता है, चाल नहीं।
- आवेश पर बल F = qvB sin θ है और तार पर F = BIL sin θ। गति क्षेत्र के अनुदिश हो तो बल शून्य होता है।
- एकसमान क्षेत्र के लंबवत गतिमान आवेशित कण r = mv ÷ (qB) त्रिज्या के वृत्त में चलता है।
- लंबा सीधा तार क्षेत्र B = μ₀I ÷ (2πr) बनाता है, और परिनालिका के भीतर B = μ₀nI होता है, जहाँ n प्रति मीटर फेरे हैं।
- दो समांतर तार तब आकर्षित होते हैं जब धाराएँ एक ही दिशा में हों और विपरीत दिशाओं में हों तो प्रतिकर्षित होते हैं।
मुख्य समीकरण
F = qvB sin θF = BIL sin θB = μ₀I ÷ (2πr)B = μ₀nI (solenoid)r = mv ÷ (qB)F ÷ L = μ₀I₁I₂ ÷ (2πd)Φ = BA cos θ
हल किया हुआ उदाहरण
एक प्रोटॉन (q = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, m = 1.67 × 10⁻²⁷ kg) 0.10 T के क्षेत्र के लंबवत 1.0 × 10⁶ m/s से चलता है। F = qvB = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 1.0 × 10⁶ × 0.10 = 1.6 × 10⁻¹⁴ N। त्रिज्या r = mv ÷ (qB) = 1.67 × 10⁻²⁷ × 1.0 × 10⁶ ÷ (1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.10) = 0.10 m।
आम गलतियाँ
- क्षेत्र की दिशा में गतिमान आवेश पर बल की अपेक्षा करना। वहाँ बल शून्य होता है।
- दाएँ हाथ के नियम में ऋणात्मक आवेश के लिए दिशा उलटना भूल जाना।
- यह सोचना कि चुंबकीय बल कण की चाल बढ़ाता है। वह कार्य नहीं करता, इसलिए चाल नियत रहती है।
अभ्यास
इस विषय के अभ्यास प्रश्नों से खुद को परखें: चुंबकत्व