अच्छा प्राइमर कैसा होता है
- लंबाई: 18 से 30 बेस।
- GC कंटेंट: 40 से 60%।
- मेल्टिंग टेम्परेचर: लगभग 55 से 65 °C, और जोड़ी के दोनों प्राइमर एक-दूसरे से करीब 5 °C के अंदर।
- 3′ सिरा: G या C पर खत्म हो, जिसे GC क्लैंप कहते हैं, पर आखिरी 5 बेस में 3 से ज़्यादा G या C न हों।
- इनसे बचें: एक ही बेस की लंबी लड़ी, ऐसे हिस्से जो प्राइमर के साथ ही जोड़ा बनाएँ (हेयरपिन और प्राइमर डाइमर), और ऐसे हिस्से जो दूसरे प्राइमर से जुड़ें।
मेल्टिंग टेम्परेचर
सबसे आसान फ़ॉर्मूला हर A या T के लिए 2 °C और हर G या C के लिए 4 °C गिनता है, और सिर्फ़ छोटे प्राइमर के लिए ठीक है। लंबे प्राइमर का अनुमान GC पर आधारित फ़ॉर्मूले से, सॉल्ट करेक्शन के साथ, या सबसे अच्छा नियरेस्ट-नेबर तरीके से लगता है, जो पड़ोसी बेस की हर जोड़ी देखता है और प्राइमर व सोडियम की सांद्रता भी गिनता है।
अपने प्राइमर जाँचें
- अपने प्राइमर, हर लाइन में एक, PCR प्राइमर आँकड़े में पेस्ट करें।
- अपने रिएक्शन की प्राइमर और सोडियम सांद्रता डालें।
- Tm की तुलना करें और हेयरपिन, सेल्फ़-डाइमर, लड़ी या 3′ सिरे की चेतावनियाँ पढ़ें।
प्रोडक्ट जाँचें
PCR उत्पाद ढूँढता है कि फ़ॉरवर्ड और रिवर्स प्राइमर टेम्पलेट पर कहाँ जुड़ते हैं, और हर प्रोडक्ट का साइज़ और सीक्वेंस बताता है, ताकि कोई अतिरिक्त बाइंडिंग साइट जेल चलाने से पहले ही दिख जाए। प्राइमर मैप सीक्वेंस पर प्राइमर का सेट तीरों के साथ दिखाता है जो उनकी दिशा बताते हैं।