टोन जनरेटर
टोन जनरेटर कैसे इस्तेमाल करें
- स्लाइडर से आवृत्ति तय करें या Hz में लिखें।
- तरंग का रूप, आवाज़ का स्तर और कौन सा कान चुनें।
- बजाएँ दबाएँ। दूसरी आवृत्ति तक फिसलना हो तो स्वीप का डिब्बा चुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टोन जनरेटर किस काम आता है?
स्पीकर या हेडफ़ोन की रेंज जाँचने, कमरे या गाड़ी में खड़खड़ाहट या अनुनाद ढूँढने, अपनी सुनने की सीमा परखने, कान से वाद्य मिलाने, और ऑडियो उपकरण नापते समय संदर्भ के तौर पर।
कौन सी तरंग चुनूँ?
साइन तरंग एक ही शुद्ध आवृत्ति है और जाँच के लिए वही चाहिए। वर्ग, त्रिभुज और आरा तरंगें आवृत्ति के ऊपर हार्मोनिक जोड़ती हैं, इसलिए वे कर्कश लगती हैं और सिंथ ध्वनियों में इस्तेमाल होती हैं।
मैं कितनी ऊँची आवृत्ति तक सुन सकता हूँ?
जवान लोग करीब 17 से 20 kHz तक सुनते हैं, और उम्र के साथ ऊपरी सिरा गिरता है: 50 के बाद कई लोग 12 kHz पर रुक जाते हैं। धीमे से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ, और याद रखें कि फ़ोन और लैपटॉप के स्पीकर अक्सर 15 kHz से ऊपर या 100 Hz से नीचे कुछ नहीं दे पाते।
आवाज़ तेज़ क्यों नहीं है?
आवाज़ जानबूझकर कम रखी है। तेज़ शुद्ध टोन, ख़ासकर ऊँचे, कान को जल्दी नुक़सान पहुँचा सकते हैं क्योंकि उनकी पूरी ऊर्जा एक ही आवृत्ति पर होती है। धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
दिखाया गया तरंगदैर्घ्य किस काम का है?
यह हवा में एक चक्र की लंबाई है, जो कमरे की ध्वनिकी में काम आती है: अर्ध तरंगदैर्घ्य पर खड़ी तरंगें बनती हैं, इसलिए 3.4 मी तरंगदैर्घ्य वाला 100 Hz का टोन वही है जो छोटे कमरे में गूँजता है।